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नन्हीं कवियत्री सिमरन राठौड़ के कविता ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है|
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रविवार, अक्टूबर 16, 2011
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यात्रा
"एक-दो-तीन-चार"
चार पे लगाओ अपनी रोटी पर आचार
"पांच-छै-सात-आठ"
लगाओ सामान पर रस्सी की गांठ
"नौ-दस"
दस पर चलेगी अपनी सीकर की बस|
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